Thursday, October 6, 2011

अपने रावण को मारो

|| ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ||
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें, वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।
अपने रावण को मारो    
वह था संस्कृत और वेद का विद्वान 
कुबेर का भ्राता
पुलस्त्य  ऋषि का पौत्र   
विश्रवस निकषा  का पुत्र  
शंकर का अनन्य भक्त
तांडव स्तोत्र का रचयिता  
स्वर्ण लंका का अधिपति 
दशासन रावण
रखता था नाभि में 
अमृत कुंड!
पर एक कुविचार प्रेरित कृत्य के कारण 
मारा गया 
श्री राम के हाथों
नाभि पे लगे बाणों से 
जहाँ अमृत था 
आज हम उसका पुतला बना कर 
भेदते है बाण से  
उसकी नाभि नहीं 
उसका ह्रदय 
क्यों की हृदय में ही 
उत्पन्न होते हैं विचार कुविचार 
अर्थात वही होता है रावणी विचार 
तो फिर 
रावण का पुतला फुकने से पहले
तुम क्यों नही हनन करते
अपने ह्रदय के कुविचारों को
तब तक तुम्हे क्या हक़ है
की फूंको रावण के पुतले को
कुछ नहीं हासिल होगा तुम्हे
जब तक तुम नहीं मारते 
अपने भीतर का रावण
और नहीं संवारते 
अपना अंतःकरण 
जिससे संपन्न हो सदा सुकृत्य
महान  हो आदर्श हो चरित्र 




आप सब को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतिक दशहरा पर्व पर हार्दिक शुभ कामनाएं एवं बधाई 

58 comments:

  1. कुछ नहीं हासिल होगा तुम्हे
    जब तक तुम नहीं मारते
    अपने भीतर का रावण
    और नहीं संवारते
    अपना अंतःकरण
    bahut sahi ... shubhkamnayen

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  2. विजयदशमी की शुभकामनायें .....

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  3. जब तक तुम नहीं मारते
    अपने भीतर का रावण
    और नहीं संवारते
    अपना अंतःकरण
    जिससे संपन्न हो सदा सुकृत्य
    महान हो आदर्श हो चरित्र

    बहुत सुंदर ...शुभकामनायें

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  4. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! लाजवाब प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को दशहरे की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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  5. प्रभाव डालती रचना के लिए बधाई ..

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  6. Bahut sundar aur sarthak post, aabhar

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  7. जब तक तुम नहीं मारते
    अपने भीतर का रावण
    और नहीं संवारते
    अपना अंतःकरण
    जिससे संपन्न हो सदा सुकृत्य
    महान हो आदर्श हो चरित्र

    बहुत सुंदर प्रभाव डालती रचना...शुभकामनायें

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  8. MADAN JEE
    JAANDAAR SHAANDAAR PRASTUTI

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  9. रश्मि प्रभा जी. चैतन्य शर्मा जी तथा डॉ॰ मोनिका शर्मा जी यहाँ आने के लिए आप का धन्यवाद
    आप सब भी अच्छा कार्य कर रहे है बस आज जरुरत है हमें मिल के साथ चलने की, एक विचार होने की,
    मेरे ब्लॉग पर आने और टिप्पणी दे कर हौसला आफजाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया
    आशा है आपका मार्गदर्शन यूँ ही निरंतर प्राप्त होता रहेगा ........

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  10. बबली जी . वर्ज्य नारी स्वर जी .एस .एन शुक्ल जी. संध्या शर्मा जी तथा वीरेंदर जी यहाँ आने के लिए आप का धन्यवाद
    आप सब भी अच्छा कार्य कर रहे है बस आज जरुरत है हमें मिल के साथ चलने की, एक विचार होने की,
    मेरे ब्लॉग पर आने और टिप्पणी दे कर हौसला आफजाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया
    आशा है आपका मार्गदर्शन यूँ ही निरंतर प्राप्त होता रहेगा ......

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    विजयदशमी की शुभकामनायें ...

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  12. आदरणीय मदन जी हार्दिक अभिवादन ....
    बहुत सही कहा आपने
    अच्छी रचना के लिए आभार !

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  13. बिलकुल सही है आज के रावण तो न जाने कितने कितने पाप करते है और जनता को रोज़ जला रहे है॥
    दशहरे की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें

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  14. रावण का पुतला फुकने से पहले
    तुम क्यों नही हनन करते
    अपने ह्रदय के कुविचारों को
    तब तक तुम्हे क्या हक़ है
    की फूंको रावण के पुतले को
    बहुत सही कहा आपने
    अच्छी रचना के लिए आभार !

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  15. आपने सही लिखा मदन जी,
    सुन्दर जानकारी......बहुत बहुत आभार ..

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  16. बहुत सुन्दर और प्रेरक प्रस्तुति है,मदन भाई.
    अपने स्वयं के रावण को मारना यानि
    अहंकार वृति का निरंतर शमन करने की कोशिश
    करते रहना चाहिये.

    विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  17. रावण का पुतला फुकने से पहले
    तुम क्यों नही हनन करते
    अपने ह्रदय के कुविचारों को
    तब तक तुम्हे क्या हक़ है
    की फूंको रावण के पुतले को

    आपने बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कही है। शुभकामनायें।

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  18. satik lekhni...madan ji

    saarthak shabdo ke sath ....aabhar

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  19. सुरेन्द्र शुक्ल जी, अर्चना जौहरी जी, रवि कान्त जी. राम प्रताप जी, तथा हिमांशु गुप्ता जी जी यहाँ आने के लिए आप का धन्यवाद | मेरे ब्लॉग पर आने और टिप्पणी दे कर हौसला आफजाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया |
    आशा है आपका मार्गदर्शन यूँ ही निरंतर प्राप्त होता रहेगा .......

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  20. सविता बजाज जी, आदरणीय गुरु राकेश कुमार जी तथा अंजू (अनु ) चौधरी जी यहाँ आने के लिए आप का धन्यवाद | मेरे ब्लॉग पर आने और टिप्पणी दे कर हौसला आफजाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया |

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  21. हां, पहले अपने भीतर के रावण को मारना होगा।
    प्रेरक कविता।

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  22. बिलकुल सत्य वचन
    आपको भी विजय दशमी की शुभकामनाएं|
    देरी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ|

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  23. आओ, सब मिलकर 'कांग्रेस के रावण' का संहार करें और माँ भारती को आज़ादी दिलाएं...

    जय श्री राम...

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  24. बहुत अच्छे विचार रखे हैं आपने
    आपको भी विजय दशमी की शुभकामनाएं|

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  25. प्रेरक कविता।
    सबसे बड़ा सच यही है कि अच्छे संस्कार ही बुराई से लड़ने के सबसे बेहतर उपकरण हैं... अच्छे संस्कारों से ही बुराई से लड़ा जा सकता है।

    सब को दशहरा तथा विजयदशमी की ढेरों शुभकामनाएँ

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  26. मदन जी अब तो महर्षि निर्वाण दिवस भी आ रहा है आप क्या कर रहे हैं आशा है उचित जानकारी मिलेगी

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  27. आपकी सकारात्मक सोच व उसकी इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति ने दिल को छू लिया |बहुत-बहुत बधाई |

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  28. aapne achhi bat batai hai madan ji > ye to hame khud sochana hoga ki ham kya kare kya na kare...
    aabhaar...........................

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  29. सुन्दर प्रस्तुति |
    बहुत अच्छा प्रयास है आपके बधाई हो ....

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  30. अच्छी अभिव्यक्ति के लिए बधाई |

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  31. सच ... बहुत ही सार्थक लेखन ... आज के दौर का सफल चित्रण है ये रचना

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  32. आपका हर आलेख नई जानकारी और गहन शोध लेकर आता है। इस विषय पर अल्प जानकारी थी जिसमें प्रचुर वृद्धि हुई।
    इतनी अच्छी जानकारी के लिए आभार

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  33. कुछ नहीं हासिल होगा तुम्हे
    जब तक तुम नहीं मारते
    अपने भीतर का रावण

    bahut sahi ... shubhkamnayen

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  34. This comment has been removed by the author.

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  35. कुछ नहीं हासिल होगा तुम्हे
    जब तक तुम नहीं मारते
    अपने भीतर का रावण
    और नहीं संवारते
    अपना अंतःकरण
    जिससे संपन्न हो सदा सुकृत्य
    महान हो आदर्श हो चरित्र


    एक-एक शब्द.... सुन्दर बिम्ब प्रयोग....
    सार्थक रचना....बधाई.

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  36. bilkul sahi kaha hai .....sarthak rachna ke liye badhai aapko ......

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  37. लाजवाब प्रस्तुती.
    आपको एवं आपके परिवार को दशहरे की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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  38. कुछ नहीं हासिल होगा तुम्हे
    जब तक तुम नहीं मारते
    अपने भीतर का रावण
    और नहीं संवारते
    अपना अंतःकरण

    ....बहुत सटीक अभिव्यक्ति...जब तक हम अपने अन्दर के रावण को नही मारते, तब तक कुछ नही होगा..

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  39. एकदम सही, लाजवाब प्रस्तुती|

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  40. आपकी सकारात्मक सोच व उसकी इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति ने दिल को छू लिया |बहुत-बहुत बधाई |

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  41. आदरणीय मदन जी नमस्ते ! आपने ठीक लिखा है
    कुछ नहीं हासिल होगा तुम्हे
    जब तक तुम नहीं मारते
    अपने भीतर का रावण
    और नहीं संवारते
    अपना अंतःकरण
    महर्षि दयानंद का हम नारी जाति पर बहुत अहसान है देखिये कोशिश करुँगी वैसे उनके बारे में मेरी शिक्षा बहुत ही कम है और जानने का प्रयास कर रही हूँ आपका इसके लिए बहुत धन्यवाद ! आशा है की आप भी महत्वपूर्ण उनके कोटेसन भेजेंगे !!!!!!!

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  42. विजय पर्व "विजयादशमी" पर आपको ढेर सारी शुभकामनायें..

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  43. This comment has been removed by the author.

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  44. बहुत सटीक अभिव्यक्ति...जब तक हम अपने अन्दर के रावण को नही मारते, तब तक कुछ नही होगा.

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  45. बहुत प्यारे विचार ...
    अक्सर हमें अपना रावण नहीं दीखता !
    शुभकामनायें आपको !

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  46. बहुत सुंदर चिंतन ...आध्यात्मिक विचारों से साथ प्रासंगिक सच की प्रस्तुति...

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  47. achha laga
    kam se kam ek sahi arth to malom hua
    thanks

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  48. बहुत अच्छे विचार
    सुंदर आलेख आपको भी बधाई

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  49. बहुत बढ़िया आलेख.
    बहुत सी बातें ऐसी हैं जिस पर आज के समय के अनुसार विचार करना जरूरी है.
    आपका प्रयास सार्थक है.आभार

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  50. उम्दा लेख...एकदम सारगर्भित..

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  51. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com

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  52. अनुनाद करती रचना के लिए हार्दिक आभार.

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  53. प्रिय मदन भाई सुन्दर रचना सच कहा आप ने पहले दर्पण में खुद का चेहरा देखना है मन के अन्दर गोटा लगाना है फिर दुसरे को ....
    बधाई हो सुन्दर रचना
    आभार
    भ्रमर५
    रावण का पुतला फुकने से पहले
    तुम क्यों नही हनन करते
    अपने ह्रदय के कुविचारों को
    तब तक तुम्हे क्या हक़ है
    की फूंको रावण के पुतले को

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  54. बहुत बढ़िया आलेख
    बहुत सुन्दर और प्रेरक प्रस्तुति है,मदन जी

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  55. कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 15 दिनों से ब्लॉग से दूर था
    देरी से पहुच पाया हूँ

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